उज्जैन: सनातन धर्म में हर एक पर्व को बाबा महाकालेश्वर के धाम में सबसे पहले मनाने की सदियों पुरानी परंपरा रही है. मंदिर में अल सुबह 04 बजे भस्मार्ती के दौरान भगवान महाकालेश्वर की भस्मार्ती, श्रृंगार कर भगवान को पर्व अनुसार विशेष भोग लगाया जाता है. चूंकि 14 एवं 15 जनवरी दो दिन मकर संक्रांति का पर्व मनाया जाना है.
ऐसे में भगवान महाकालेश्वर का पर्व के दौरान भस्मार्ती से पूर्व तिल के तेल से अभिषेक किया जाएगा. तिल का विशेष भोग मंदिर समिति पुजारियों के माध्यम से लगाएगी. वहीं दूसरी और मकर संक्रांति के पर्व पर बड़ी संख्या में क्षिप्रा नदी में स्नान एवं नगर में दान पुण्य के लिए भक्तों का तांता लगेगा.
तिल के तेल से भगवान महाकाल का होगा स्नान
महाकालेश्वर मंदिर के पुजारी महेश गुरु ने बताया कि "मकर संक्रांति पर्व पर क्षिप्रा नदी में स्नान के बाद नगर में दान पुण्य कर भगवान महाकालेश्वर के दर्शन को बड़ी संख्या में भक्त पहुंचेंगे. अल सुबह भस्मार्ती से पूर्व पंचाभिषेक के दौरान भगवान महाकालेश्वर का तिल के तेल से स्नान करवाया जाएगा. इसके बाद विशेष श्रृंगार कर तिल के लड्डुओं का तिल से बने पकवानों का भोग भगवान को लगाया जाएगा. इतना ही नहीं भगवान की जलाधारी में भी तिल अर्पित की जाएगी. भगवान महाकाल को पतंग और मांझा भेंट किया जाएगा."
क्षिप्रा नदी में लाया गया नर्मदा का पानी
कलेक्टर रोशन कुमार सिंह ने जानकारी देते हुए बताया कि "दो दिन श्रद्धलुओं का नगर में बड़ी संख्या में आवागमन रहेगा. श्रद्दालु खास कर मकर संक्रांति पर्व पर क्षिप्रा स्नान के लिए पहुंचते हैं. श्रद्धालुओं की आस्था को ध्यान में रखते हुए पूर्व से ही क्षिप्रा में स्नान के लिए नर्मदा का पानी मिला दिया गया है. दोनों दिन 14 एवं 15 के लिए विशेष तैयारी की गई है. क्षिप्रा नदी के तमाम घाटों पर प्रशासनिक अधिकारियों की श्रद्धालुओं की सुरक्षा सुविधा को ध्यान में रखते हुए ड्यूटी लगाई गई है."
ड्रोन से नजर, पुलिस बल तैनात
एसपी प्रदीप शर्मा ने बताया कि "क्षिप्रा के सभी घाटों पर जहां जहां भक्त स्नान दान पुण्य के लिए पहुचेंगे एवं मंदिरो में सभी थाना क्षेत्रों का पुलिस बल लगाया गया है. बेरिकेटिंग की गई है, ड्रोन, सीसीटीवी से निगरानी की जा रही है. साथ ही चाइनीज मांझे की बिक्री करने वाले, उपयोग करने वालो पर भी नजर है."
अमृत सिद्धि योग में मकर संक्रांति
ज्योतिषाचार्य अमर डब्बेवाला ने बताया कि "पंचांग की गणना के अनुसार माघ मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि पर मकर संक्रांति होंगी. 14 जनवरी को दोपहर 03:05 पर सूर्य का धनु राशि को छोड़कर के मकर राशि में प्रवेश होगा. मकर राशि में सूर्य की प्रवेश काल को ही संक्रांति माना जाता है. यह कह सकते हैं कि एक राशि से दूसरी राशि में प्रवेश करने की स्थिति संक्रांति कहलाती है.
सूर्य की यह स्थिति 14 जनवरी को दोपहर 3:05 पर होगी. धर्म शास्त्रीय मान्यता के अनुसार देखे तो जब सूर्य की संक्रांति मध्यान्ह या अपरान्ह के अनुक्रम मे होती है तो उसका पर्व काल अगले दिन मनाया जाता है. इस दृष्टि से 15 जनवरी को सुबह से लेकर के दोपहर पर्यंत दान पुण्य की प्रक्रिया की जा सकती है. 14 जनवरी को बुधवार के दिन अनुराधा नक्षत्र होने से यह अमृत सिद्धि योग कहलाता है."
क्या-क्या करें दान पुण्य?
ज्योतिषाचार्य अमर डब्बेवाला के अनुसार "दान पुण्य की दृष्टि से इसका प्रभाव 15 जनवरी को दृष्टिगत होगा क्योंकि धर्मशास्त्र व अन्य धर्म ग्रंथो के अनुसार बात करें तो सूर्य की संक्रांति यदि दोपहर में या अपरान्ह में होती है तो उसका पर्व काल अगले दिन मनाया जाता है. इस दिन चावल, मूंग की दाल, सुहाग की वस्तुएं आदि दान की जा सकती हैं. वहीं गर्म ऊनी वस्त्र के साथ-साथ गृह उपयोगी वस्तुओं का दान भी किया जा सकता है.
