रायपुर : में छत्तीसगढ़ सरकार को नक्सलवाद के खिलाफ चल रही मुहिम में एक और बड़ी कामयाबी मिली है। Chhattisgarh Naxalite Surrender के तहत साउथ सब ज़ोनल ब्यूरो से जुड़े 52 माओवादी कैडरों ने हिंसा का रास्ता छोड़ते हुए मुख्यधारा को अपनाया है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने इस घटनाक्रम को शांति, विकास और विश्वास की दिशा में बड़ा कदम बताया।
₹1.41 करोड़ के इनामी माओवादियों ने छोड़ी हिंसा
मुख्यमंत्री ने जानकारी दी कि आत्मसमर्पण करने वाले इन 52 माओवादियों पर कुल ₹1.41 करोड़ का इनाम घोषित था। उन्होंने कहा कि केवल पिछले 48 घंटों में कुल 81 नक्सलियों का आत्मसमर्पण इस बात का स्पष्ट संकेत है कि माओवादी हिंसा और उसकी विचारधारा अब कमजोर पड़ रही है।
बस्तर में टूट रहा माओवाद का सपोर्ट सिस्टम
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के अनुसार बस्तर अंचल में न केवल माओवादियों की विकृत सोच, बल्कि उनका पूरा सपोर्ट सिस्टम भी लगभग ध्वस्त हो चुका है। लगातार हो रहे Chhattisgarh Naxalite Surrender यह दर्शाते हैं कि सरकार की नीतियों पर लोगों का भरोसा बढ़ा है और नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में विकास की रोशनी पहुंच रही है।
“पुनर्वास से पुनर्जीवन” अभियान से नई शुरुआत
राज्य सरकार की दृढ़ नीति, संवेदनशील दृष्टिकोण और विकास आधारित रणनीति के चलते हालात तेजी से बदल रहे हैं। “पुनर्वास से पुनर्जीवन” अभियान के तहत आत्मसमर्पण करने वाले माओवादियों को सम्मानजनक जीवन, रोजगार, शिक्षा और सामाजिक सुरक्षा से जोड़ा जा रहा है।
2026 तक नक्सल-मुक्त भारत का लक्ष्य
मुख्यमंत्री ने कहा कि यह सफलता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के मार्गदर्शन का परिणाम है। उन्होंने विश्वास जताया कि 31 मार्च 2026 तक नक्सल-मुक्त भारत के संकल्प को साकार करने में यह कदम बेहद अहम साबित होगा।
