बुजुर्ग को घर में ही बनाया बंधक और लूट लिए 1.10 करोड़; रूह कंपा देगी यह कहानी”

Gwalior Digital Arrest: ग्वालियर में नए साल में प्रदेश का सबसे बड़ा डिजिटल अरेस्ट का मामला सामने आया है. जहां एक 75 वर्षीय रिटायर्ड उप पंजीयक बिहारी लाल गुप्ता को आईपीएस और सीबीआई अधिकारी बनकर ठगों ने 31 दिन तक डिजिटल अरेस्ट किया और 1.12 करोड़ रुपए ठग लिये. 16 नवंबर 2025 को रिटायर्ड उप पंजीयक के पास कॉल आया. कॉल करने वाले ने उन्हें मनी लॉन्ड्रिंग केस में शामिल बताया और कहा कि दो लाख रुपए में उनका आईसीआईसीआई बैंक का खाता बेचा गया है, जिसका उपयोग मनी लॉन्ड्रिंग में करोड़ों रुपए के लेनदेन के लिए किया गया. इसके बाद सीबीआई अधिकारी बनकर भी कॉल किया गया. यह पूरा घटनाक्रम 16 नवंबर 2025 से 3 जनवरी 2026 के बीच खेड़ापति कॉलोनी बी-57 का है. दो दिन पहले मोबाइल पर डिजिटल अरेस्ट से सावधान रहने एक वीडियो देखने पर बुजुर्ग को ठगी का एहसास हुआ. रविवार शाम को पीड़ित पुलिस के पास पहुंचा. जिस पर क्राइम ब्रांच में मामला दर्ज कर लिया गया है.

बुजुर्ग के पास अनजान नंबर से आया कॉल
शहर के खेड़ापति कॉलोनी 57-बी निवासी 75 वर्षीय बिहारी लाल गुप्ता उप पंजीयक पद से रिटायर्ड हुए हैं. परिवार में चार बेटे हैं और चारों बेटे बाहर रहते हैं और मल्टी नेशनल कंपनी में बड़े पदों पर कार्यरत हैं. यहां बिहारी लाल और उनकी पत्नी रहते हैं. 16 नवंबर 2025 को बुजुर्ग के मोबाइल पर एक अनजान नंबर से कॉल आया. कॉल करने वाले ने खुद को ट्राई का अधिकारी रोहित शर्मा बताते हुए कहा कि आपका मोबाइल नंबर और आधार कार्ड बंद होने वाला है. जब बुजुर्ग ने पूछा ऐसा क्यों होने वाला है तो ट्राई का फर्जी अधिकारी बोला कि आपको गिरफ्तार करने के आदेश हैं. अभी आपके पास हमारे एक IPS ऑफिसर का कॉल आएगा. उसने एक मोबाइल नंबर भी बताया कि इस नंबर से कॉल आएगा. तभी उसी नंबर से वॉट्सऐप पर वीडियो कॉल आया.

सदस्यों की संपत्ति और बैंक बैलेंस की जानकारी ली
ट्राई के अधिकारी के कॉल कट करने के पांच मिनट बाद बताए नंबर से वॉट्सऐप पर वीडियो कॉल आया. बुजुर्ग ने कॉल रिसीव किया तो सामने पुलिस की वर्दी में एक युवक बैठा था. जिसने खुद का परिचय IPS नीरज ठाकुर के रूप में दिया. साथ ही बताया कि एक संदीप कुमार नाम का युवक मनी लॉन्ड्रिंग केस में पकड़ा गया है. उसने पूछताछ में बताया है कि तुमको 02 लाख रुपए देकर तुम्हारा ICICI बैंक का खाता लिया है. जिसका उपयोग मनी लॉन्ड्रिंग में किया है. इसके बाद आईपीएस अधिकारी ने बुजुर्ग से घर के सदस्यों, उसकी संपत्ति व बैंक बैलेंस की जानकारी ली. इसके साथ ही कहा कि आप बुजुर्ग हैं, इसलिए तत्काल आपको गिरफ्तार न करते हुए आपको प्री इन्वेस्टिगेशन का मौका दे रहे हैं, पर उसके लिए आपको एक आवेदन हमारे CBI अधिकारी को लिखना पड़ेगा. आईपीएस ने बुजुर्ग से आवेदन लिखवाकर अपने ही वॉट्सऐप पर सेंड करवा लिया.

बुजुर्ग ने 1.12 करोड़ ट्रांसफर किए
इसके बाद सीबीआई अधिकारी प्रदीप सिंह बनकर कॉल किया गया. इस दौरान बुजुर्ग को डराया गया कि उनकी संपत्ति की जांच होगी. उनका कैश और अन्य एफडी आरोपियों द्वारा बताए गए खाते में ट्रांसफर करनी होगी, जिसकी जांच रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया करेगा. जांच में सब कुछ सही पाए जाने पर पूरा पैसा वापस उनके ही खाते में ट्रांसफर कर दिया जाएगा. साथ ही चेतावनी दी गई कि यदि उन्होंने इस बारे में किसी से जिक्र किया तो तत्काल टीम उन्हें गिरफ्तार कर लेगी. इसके बाद बुजुर्ग ने चार बार में साइबर फ्रॉड करने वालों के बताए खातों में 1.12 करोड़ रुपए ट्रांसफर किए. हर बार जब वह रुपए भेजता था, तो उसके वॉट्सऐप पर रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया की मुहर लगा एक रिसीविंग लेटर आता था, जिससे उसे संतुष्टि हो जाती थी कि उसका पैसा रिजर्व बैंक के पास जा रहा है.

आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज
3 जनवरी 2026 को बुजुर्ग ने आखिरी ट्रांजैक्शन किया था. इसके बाद दो दिन पहले जब वह मोबाइल चला रहे थे, तो एक वीडियो सामने आया. जिसमें बताया गया था कि डिजिटल अरेस्ट जैसी कोई चीज नहीं होती और यह ठगी का तरीका है. साथ ही इस तरह के कॉल और मैसेज से सावधान रहने की अपील की गई थी. यह वीडियो देखते ही बुजुर्ग को पूरी घटना समझ में आ गई. उन्होंने कॉल और व्हाट्सऐप से आए नंबरों पर संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला. इसके बाद उन्होंने एसएसपी ग्वालियर से शिकायत की, जिसके बाद क्राइम ब्रांच ने मामला दर्ज कर लिया है. एसएसपी ग्वालियर धर्मवीर सिंह ने बताया एक रिटायर्ड ऑफिसर को साइबर फ्रॉड करने वालों ने डिजिटल अरेस्ट कर एक करोड़ से ज्यादा की ठगी की है. मामले में क्राइम ब्रांच में एफआईआर दर्ज कर जांच की जा रही है.