अभिशप्त इंदौरी पानी! क्लीनेस्ट सिटी के वॉटर लाइन में बह रहा ड्रेनेज, सैंपल सर्वे रिपोर्ट की हकीकत

इंदौर : देश के सबसे स्वच्छ इंदौर की हकीकत हैरान करने वाली है. शहर के भागीरथपुरा में जहरीला पानी पीने से बड़ी संख्या में लोग बीमार हुए. कई लोग मौत का शिकार हुए. एक तरफ सरकार जहां बचाव की मुद्रा में है तो विपक्षी दल कांग्रेस लगातार हमलावर है. इससे इतर पूरे इंदौर के लोग पाइपलाइन से सप्लाई हो रहे पानी को पीने से डर रहे हैं. क्योंकि केवल भागीरथपुरा ही नहीं, बल्कि इंदौर के कई मोहल्लों में पेयजल की पाइपलाइनों में ड्रेनेज मिल रहा है.

मौतों के बाद आईं सर्वे रिपोर्ट्स भी दिखाती हकीकत

दूषित पानी से हुई मौतों के बाद हुए सर्वे रिपोर्ट में भी ये बात साफ हो चुकी है कि जहरीले पेयजल से घातक बीमारियां हो सकती हैं. भले ही राज्य सरकार इस स्थिति पर नियंत्रण के दावे कर रही हो लेकिन पेयजल की पाइपलाइनों में बहने वाले ड्रेनेज को सुधार करना इतनी जल्दी संभव नहीं है.

इसलिए इंदौर के अधिकांश जगहों पर लोगों ने सप्लाई किए जा रहे पानी को पीने के लिए इस्तेमाल करना बंद कर दिया है. इंदौर में वाटर फिल्टर के पानी की डिमांड बढ़ गई है. यहां तक कि चाय दुकानों तक में फिल्टरयुक्त पानी ही इस्तेमाल किया जा रहा है.

1100 करोड़ पेयजल वितरण पर खर्च, फिर भी जहर बांटा

देश का सबसे स्वच्छ शहर कहलाने वाला इंदौर भागीरथपुरा कांड को लेकर लगातार बदनामी झेल रहा है. राज्य सरकार नियंत्रण के दावे कर रही है. दूसरी तरफ पेयजल की लाइनों में बहने वाला ड्रेनेज का दूषित पानी भागीरथपुरा के अलावा पूरे शहर की बड़ी समस्या बनकर उभर रहा है.

मध्य प्रदेश के सबसे समृद्ध इंदौर नगर निगम में कुल 8000 करोड़ में से करीब 1100 करोड़ रुपए हर साल जल वितरण व्यवस्था खर्च किए जाते हैं. इसके बाद भी पानी पीकर लोग मर रहे हैं. क्योंकि पाइपलाइनें कई सालों से लीकेज होने के बाद जर्जर हालत में हैं.

इंदौर में 50 साल पुरानी पाइपलाइनें जर्जर

हर महीने सबसे ज्यादा पानी का बिल चुकाने के बावजूद शहरवासियों को पेयजल के नाम पर कई सालों से ड्रेनेजयुक्त पानी की सप्लाई हो रही है. यह स्थिति सिर्फ भागीरथपुरा की नहीं बल्कि शहर के अधिकांश इलाकों की है, जहां लोग पानी का सर्वाधिक बिल चुकाने के बावजूद दूषित पेयजल की त्रासदी से जूझने को मजबूर हैं.

रोज पानी खरीदकर पीने की स्थिति नहीं

भागीरथपुरा की रहने वाली वंदना यादव कहती हैं "पूरे इलाके में पेयजल को लेकर दहशत है. कई लोग बीमार हो चुके हैं. यहां इतने संपन्न लोग नहीं है कि रोज पानी खरीदकर पी सकें. इसलिए यही पानी पीना ही पड़ेगा. वहीं, क्षेत्रीय पार्षद कमल वाघेला पार्षद का कहना है "हल्की-फुल्की शिकायतें दूषित पेयजल को लेकर आती रही हैं. लेकिन किसी ने नहीं सोचा होगा कि मामला इतना गंभीर हो सकता है. समझ नहीं आ रहा कि पानी इतना दूषित अचानक कैसे हो गया."

भागीरथपुरा में 60 में से 35 सैंपल फेल

दो दिन पहले एमजीएम मेडिकल कॉलेज की सर्वे रिपोर्ट में भी यही बात सामने आई कि भागीरथपुरा पानी में सप्लाई किया गया पानी बेहद दूषित था. कॉलेज की टीम ने कई सैंपल लिए. रिपोर्ट के अनुसार 60 में से 35 सैंपल फेल मिले. यहां तक कि वार्ड के बीजेपी पार्षद कमल वाघेला के बोरिंग का पानी भी दूषित मिला. भागीरथपुरा के अन्य जलस्रोतों का पानी भी जहरीला मिला. एमजीएम मेडिकल कॉलेज के डीन अरविंद घनघोरिया के अनुसार "भागीरथपुरा में पानी के सैंपल्स में कोलीफॉर्म बैक्टीरिया मिले हैं. जो आमतौर पर दूषित पानी में मिलते हैं."

स्टेट सर्विलांस टीम की रिपोर्ट भी चिंतित करने वाली

इसी सप्ताह भागीरथपुरा में पहुंची स्टेट सर्विलांस टीम ने भी सर्वे करने के बाद जांच रिपोर्ट दी. सर्विलांस ऑफिसर डॉ. अश्विन भगवत ने मीडिया से कहा, '' भागीरथपुरा में कई तरह का पानी सप्लाई किया जा रहा था, जो अचानक व्यापक रूप से फैलने वाली बीमारी का कारण बन गया. पानी में मिले संक्रमण फैलाने वाले बैक्टीरिया को डिटेक्ट किया गया है, जिसकी रोकथाम के लिए तत्काल कदम उठाए गए हैं."

उमंग सिंघार ने किया पानी ऑडिट, आरोप बेहद गंभीर

इसी सप्ताह विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने भागीरथपुरा के अलावा कई मोहल्लों में पानी का ऑडिट किया. सिंघार ने सबूतों के साथ बताया "भागीरथपुरा के साथ ही इंदौर के अधिकांश इलाकों में दूषित पानी सप्लाई किया जा रहा है. भागीरथपुरा की पानी की सप्लाई में मलमूत्र मिला है. भागीरथपुरा और इससे लगे क्षेत्रों में जो पानी सप्लाई किया जा रहा है, उसमें मानव मलमूत्र वाले बैक्टीरिया हैं. अगर ऐसा पानी शहर को सप्लाई होता रहा तो कई फिर कई लोगों की जान जा सकती है."

कांग्रेस ने की श्वेत-पत्र जारी करने की मांग

इधर, कांग्रेस ने इंदौर में दूषित पानी के कारण कई लोगों की मौत के मामले में न्यायिक जांच आयोग गठित करने के साथ सरकार से श्वेत-पत्र जारी करने की मांग की है. कांग्रेस 11 जनवरी को इंदौर में न्याय यात्रा भी निकालने जा रही है. इंदौर में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने कहा "इंदौर कभी स्वच्छता के लिए उदाहरण माना जाता था लेकिन इस घटना से पूरी दुनिया में इंदौर की बदनामी हो चुकी है."

महापौर भार्गव और मंत्री विजयवर्गीय निशाने पर

जीतू पटवारी ने महापौर पुष्यमित्र भार्गव को आज़ादी के बाद का सबसे कमजोर महापौर बताते हुए कहा "उन्होंने इंदौर की छवि को नुकसान पहुंचाया है." साथ ही मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के बयानों को भी उन्होंने शहर को शर्मसार करने वाला बताया और सवाल किया "नैतिकता के आधार पर वे इस्तीफा क्यों नहीं दे रहे."

पूरे प्रदेश में स्वच्छ जल अभियान की घोषणा

दूसरी तरफ, इंदौर के भागीरथपुरा कांड के कारण अब पूरे प्रदेश में लोगों को साफ पानी मुहैया कराने की दिशा में स्वच्छ जल अभियान चलाया जाने की घोषणा मुख्यमंत्री मोहन यादव ने की है. अपर मुख्य सचिव एवं इंदौर संभाग के प्रभारी अनुपम राजन और मुख्यमंत्री कार्यालय के अपर मुख्य सचिव नीरज मंडलोई ने बताया "अभियान का मुख्य उद्देश्य सभी शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल गुणवत्ता का व्यापक परीक्षण करना है. साथ ही जल आपूर्ति प्रणाली में लीकेज, दूषित जल की पहचान कर समय पर सुधार करना है."

इंदौर नगर निगम के बोरवेल सील करने का निर्णय

इंदौर के भागीरथपुरा कांड के बाद राज्य शासन स्तर पर कई निर्णय लिए गए हैं. इसमें मुख्य रूप से नगर निगम के उन बोरवेलों को सील करने का निर्णय लिया गया, जो सीधे मुख्य पाइपलाइन से जुड़े हुए हैं. भागीरथपुरा में 12 या 13 जनवरी से पानी की आपूर्ति टंकी के माध्यम से पुनः शुरू कर दी जाएगी. हालांकि एहतियात के तौर पर पानी को उबालकर पीने की एडवाइजरी अभी भी जारी रहेगी.

भागीरथपुरा में स्वास्थ्य टीमें तैनात रहेंगी

भागीरथपुरा क्षेत्र में 6 हजार परिवारों की स्वास्थ्य आधारित निगरानी के लिए 20 से 25 जोन के तमाम अधिकारी 50 से 100 घरों की लक्ष्य के अनुरूप मॉनिटरिंग करेंगे, ताकि अस्पताल से डिस्चार्ज हुए मरीजों पर लगातार निगरानी रखी जा सके और भविष्य में किसी भी बीमारी को रोका जा सके.

इसके अलावा पूरे शहर की जल आपूर्ति और भूजल गुणवत्ता की निगरानी भी की जा रही है. शहर की 105 से अधिक पानी की टंकियों में कंप्यूटरीकृत वाटर एनालाइजर लगाए जाएंगे, जिससे कंट्रोल रूम में रियल टाइम जल गुणवत्ता की जानकारी मिल सके. पुरानी पाइपलाइनों, लीकेज और चैंबरों की मरम्मत का कार्य भी तेजी से किया जा रहा है.