प्रयागराज माघ मेले में श्रद्धालुयों के लिए सहुलियत, पर्यटन विभाग ने बनाया 4 टूरिस्ट सेंटर

इलाहबाद।प्रयागराज माघ मेला में आने वाले श्रद्धालुयों की सहुलियत के लिए पर्यटन विभाग ने चार टूरिस्ट सेंटर बनाए हैं। यह सेंटर माघ मेला के दौरान आने वाले लाखों श्रद्धालुओं को संस्कृति, इतिहास, आस्था और सुरक्षा से परिचित कराने के साथ-साथ उन्हें सहज और सुरक्षित यात्रा के बारे में जानकारी देंगे। मसलन, माघ मेला क्षेत्र से बाहर जाने के लिए क्या सुविधाएं हैं। बस-ट्रेन के अलावा हवाई जहाज के शड्यूल के बारे में जानकारी लेने के लिए श्रद्धालुओं को भटकने की जरूरत नहीं होगी।दरअसल, माघ मेला का आयोजन 3 जनवरी से शुरू होकर लगभग 45 दिनों तक चलेगा, जिसमें लगभग 12 से 15 करोड़ श्रद्धालु पवित्र संगम में स्नान और दर्शन के लिए शामिल होंगे। मेले के प्रति नजदीकी ट्रेनों, बसों और भीड़ की संख्या को देखते हुए प्रशासन ने व्यापक तैयारियां की हैं। इसके लिए चार अस्थाई टूरिस्ट सेंटर बनाए गए हैं। इस बार माघ मेला प्रशासन आस्था और अनुभव को आधुनिक सुविधाओं से जोड़कर विश्व स्तर पर एक सुदृढ़ धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजन के रूप में पेश किया है। इससे श्रद्धालुओं में आस्था के प्रति जुड़ाव होगा।

-श्रद्धालुओं को पहले से मौसम की भविष्यवाणी की जानकारी मिलेगी

-सांस्कृतिक और आध्यात्मिक महत्व के बारे में जानकारी दी जाएगी

-इतिहास, धार्मिक परंपराओं से जुड़े स्थानों के बारे में मार्गदर्शन देंगे

-श्रद्धालुओं को आपातकाल स्थिति में निपटने के बुनियादी जानकारी

-मेडिकल सुविधा और मिसिंग स्टेशन की प्रक्रिया के बारे में बताएंगे

डिजिटल पोर्टल सेवा और 12 प्राथमिक चिकित्सा केंद्र भी होंगे

माघ मेले में आने वाले श्रद्धालुओं को मेडिकल सुविधाओं को उच्च प्राथमिकता दी गई है। इलाके में दो स्थायी अस्पताल और 12 प्राथमिक चिकित्सा चौकियां बनाई गई है, जिनमें डॉक्टर और पैरामेडिकल स्टाफ 24 घंटे अपनी सेवाएं देंगे। इसके अलावा यात्रा के दौरान पर्यटक ऑनलाइन भुगतान सुविधाओं और डिजिटल सेवा पोर्टल के माध्यम से टिकट, आवागमन और सहायता संबंधी जानकारी ले सकेंगे।

मेला रेल सर्विस श्रद्धालु आसानी से पहुंच सकेंगे

पर्यटन एवं सांस्कृतिक मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि टूरिस्ट सेंटरों में श्रद्धालुओं के लिए विशेष गाइडेड टूर पैकेज, सुरक्षित प्रतीक्षा क्षेत्र, पीड़ित सहायता काउंटर और चालक तथा परिवार के सदस्यों के लिए अलग मार्गदर्शन केंद्र भी होंगे। ताकि लोग मुख्य स्नान स्थलों और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आनंद ले सकें। इन केंद्रों का लक्ष्य न केवल सांस्कृतिक और दार्शनिक ज्ञान देना है, बल्कि श्रद्धालुओं की यात्रा को सुरक्षित, सरल और यादगार बनाना भी है।