वाशिंगटन। अमेरिका (America) द्वारा वेनेजुएला (Venezuela) पर की गई सैन्य कार्रवाई ने वैश्विक वित्तीय बाजारों (Global financial markets) में भू-राजनीतिक तनाव बढ़ा दिया है। इससे भारतीय शेयर बाजार (Indian stock market), सोने, चांदी और कच्चे तेल पर संभावित प्रभावों का आकलन किया जा रहा है। जानें, निवेशकों को क्या सावधानियां बरतनी चाहिए।
अमेरिका द्वारा वेनेजुएला पर की गई सैन्य कार्रवाई के बाद वैश्विक स्तर पर भू-राजनीतिक तनाव बढ़ गया है, जिसका असर अंतरराष्ट्रीय वित्तीय बाजारों के साथ-साथ भारत पर भी पड़ता नजर आ रहा है। वेनेजुएला दुनिया का सबसे बड़ा तेल भंडार रखने वाला देश है, इसलिए इस घटनाक्रम ने निवेशकों को सतर्क कर दिया है और शेयर बाजार से लेकर सोना-चांदी तथा कच्चे तेल तक सभी एसेट क्लास पर इसका प्रभाव देखा जा रहा है।
भारतीय शेयर बाजार की बात करें तो फिलहाल किसी बड़ी घबराहट के संकेत नहीं हैं, लेकिन अस्थिरता बढ़ने की संभावना जरूर बनी हुई है। यदि कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आती है, तो इससे महंगाई और चालू खाते के घाटे को लेकर चिंताएं बढ़ सकती हैं, जिसका दबाव ऑयल मार्केटिंग कंपनियों, एयरलाइंस और उपभोक्ता आधारित कंपनियों के शेयरों पर पड़ सकता है।
दूसरी ओर डॉलर के मजबूत होने की स्थिति में आईटी कंपनियों के शेयरों को कुछ समर्थन मिल सकता है। कुल मिलाकर बाजार में बड़ी गिरावट की बजाय सीमित दायरे में उतार-चढ़ाव की स्थिति बनती दिख रही है।
सोने पर इफेक्ट
भू-राजनीतिक तनाव का सीधा फायदा सोने को मिलता दिख रहा है। अनिश्चित माहौल में निवेशक सुरक्षित निवेश की ओर रुख करते हैं और सोना पारंपरिक रूप से उनका पसंदीदा विकल्प रहा है। वेनेजुएला संकट के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमतों में मजबूती देखी जा रही है। यदि तनाव लंबा खिंचता है तो सोना नए रिकॉर्ड स्तरों के करीब पहुंच सकता है।
चांदी में तेज उतार-चढ़ाव बना रहेगा
चांदी पर इस घटनाक्रम का असर थोड़ा अलग नजर आता है। एक तरफ सुरक्षित निवेश की मांग चांदी को सहारा देती है, वहीं दूसरी ओर वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता औद्योगिक मांग को प्रभावित कर सकती है। इसी वजह से चांदी की कीमतों में तेजी के साथ तेज उतार-चढ़ाव बने रहने की संभावना है।
महंगा हो सकता है कच्चा तेल
कच्चे तेल के मोर्चे पर फिलहाल स्थिति संतुलित है, क्योंकि वेनेजुएला से वैश्विक बाजार में पहले ही सीमित मात्रा में तेल की आपूर्ति हो रही थी। हालांकि इस सैन्य कार्रवाई से तेल बाजार में ‘रिस्क प्रीमियम’ जुड़ गया है। यदि तनाव बढ़ता है या तेल आपूर्ति से जुड़े अन्य क्षेत्रों में अस्थिरता आती है, तो कच्चा तेल आने वाले समय में महंगा हो सकता है।
भारत के लिए राहत की बात यह है कि वह फिलहाल वेनेजुएला से कच्चा तेल आयात नहीं करता और उसकी आपूर्ति रूस तथा पश्चिम एशिया से स्थिर बनी हुई है। मजबूत विदेशी मुद्रा भंडार भी भारत को इस वैश्विक संकट से निपटने में सहारा दे सकता है।
