भारतीय घरों में वास्तु का खास महत्व माना जाता है. जब भी घर बनवाने या सजाने की बात आती है, तो लोग इस बात का ध्यान रखते हैं कि घर में सुख, शांति और खुशहाली बनी रहे. इसी कारण मुख्य द्वार को सबसे अहम हिस्सा माना गया है. ऐसा कहा जाता है कि घर में आने वाली हर ऊर्जा सबसे पहले यहीं से प्रवेश करती है. यदि द्वार पर सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह बना रहे, तो पूरे घर का माहौल अच्छा रहता है. वहीं नकारात्मक ऊर्जा का असर घर के लोगों पर पड़ सकता है. इसी सोच के चलते लोग मुख्य द्वार पर कई तरह के वास्तु उपाय अपनाते हैं. इन्हीं उपायों में से एक है घोड़े की नाल लगाना. आपने अक्सर कई घरों के दरवाजे पर लोहे की घोड़े की नाल लगी देखी होगी. कुछ लोग इसे सिर्फ परंपरा मानते हैं, जबकि वास्तु शास्त्र में इसके पीछे खास कारण बताए गए हैं. मान्यता है कि सही तरीके से लगाई गई घोड़े की नाल घर को बुरी नजर से बचाती है और सकारात्मक माहौल बनाए रखने में मदद करती है. आइए जानते हैं घोड़े की नाल से जुड़े वास्तु लाभ और इसे लगाने का सही तरीका.
घोड़े की नाल के वास्तु लाभ
वास्तु शास्त्र के अनुसार, घोड़े की नाल का संबंध शनि ग्रह से माना जाता है. लोहे से बनी होने के कारण यह नकारात्मक ऊर्जा को रोकने का काम करती है. ऐसा माना जाता है कि मुख्य द्वार पर घोड़े की नाल लगाने से घर में आने वाली बुरी नजर और नकारात्मक शक्तियां बाहर ही रुक जाती हैं. इससे घर में सुख-शांति और समृद्धि बनी रहती है.
जिन लोगों की कुंडली में शनि दोष होता है, उनके लिए भी यह उपाय लाभकारी माना जाता है. घोड़े की नाल लगाने से शनि से जुड़े अशुभ प्रभाव कम हो सकते हैं. इसके साथ ही यह घर के वातावरण को स्थिर और शांत बनाए रखने में सहायक मानी जाती है.
मुख्य द्वार पर घोड़े की नाल क्यों लगानी चाहिए?
वास्तु मान्यताओं के अनुसार, मुख्य द्वार पर घोड़े की नाल लगाने से नकारात्मक शक्तियों का प्रवेश रुकता है. इससे घर के भीतर सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह बना रहता है.
यह उपाय आर्थिक स्थिति को मजबूत करने में सहायक माना जाता है. कहा जाता है कि इससे धन से जुड़ी परेशानियां धीरे-धीरे कम होने लगती हैं.
घर में आपसी तनाव और कलह की स्थिति में भी कमी आती है, जिससे परिवार के सदस्यों के बीच तालमेल बेहतर बना रहता है. घोड़े की नाल को नजर दोष से बचाव का भी प्रभावी उपाय माना गया है.
घोड़े की नाल लगाने का सही तरीका
-हमेशा उस घोड़े की नाल का ही उपयोग करें, जिसे घोड़े ने पहना हो. नई या फैक्ट्री में बनी नाल की जगह पुरानी नाल को अधिक प्रभावी माना जाता है.
-नाल को मुख्य द्वार के ऊपर यू आकार में लगाना शुभ माना जाता है, ताकि उसका खुला भाग ऊपर की ओर रहे.
-शनिवार का दिन घोड़े की नाल लगाने के लिए सबसे अच्छा माना जाता है.
-नाल को लगाने से पहले गंगाजल से धोना शुभ समझा जाता है.
घोड़े की नाल लगाते समय ध्यान रखने वाली बातें
कभी भी टूटी, मुड़ी या ज्यादा जंग लगी नाल का उपयोग न करें.
सिर्फ सजावट के लिए बनाई गई नकली नाल से वास्तु लाभ नहीं मिलता.
नाल को जमीन पर फेंकने या पैर से छूने से बचना चाहिए.
